पा-ब-गिल सब हैं, रिहाई की करे तदबीर कौन
दस्त-बस्ता शहर में खोले मेरी ज़ंजीर कौन
(पा-ब-गिल= दलदल में फँसा हुआ, क़ैदी, बेबस; तदबीर =उपाय ; दस्त-बस्ता= जिस के हाथ बंधे हुए हों)
---------------------------------------------------
मेरा सर हाज़िर है, लेकिन मेरा मुन्सिफ देख ले
कर रहा है मेरे फ़र्दे-जुर्म को तहरीर कौन
(मुन्सिफ = न्यायाधीश, फ़र्दे-जुर्म=आरोप पत्र, तहरीर=लिखना)
---------------------------------------------------
मेरी चादर तो छिनी थी शाम की तनहाई में
बे रिदाई को मेरी फिर दे गया तशहीर कौन
(बे रिदाई= बिना स्कार्फ या नंगे सर होना, तशहीर= प्रचार, विज्ञापन)
---------------------------------------------------
सच जहाँ पा-बस्ता मुल्ज़िम के कटहरे में मिले
उस अदालत में सुनेगा अद्ल की तफ़्सीर कौन
( पा-बस्ता= जिस के पाँव बंधे हुए हों ;अद्ल=न्याय)
---------------------------------------------------
नींद जब ख़्वाबों से प्यारी हो तो ऐसे अह'द में
ख़्वाब देखे कौन और ख़्वाबों को दे ताबीर कौन
(अह'द = वादा, पक्का निश्चय, दृढ़ संकल्प; ताबीर =स्वप्नफल बताना)
---------------------------------------------------
रेत अभी पिछले मकानों की न वापस आई थी
फिर लबे-साहिल घरोंदा कर गया तामीर कौन
(लबे-साहिल= नदी के किनारे ;तामीर = निर्माण)
---------------------------------------------------
सारे रिश्ते हिज्रतों में साथ देते हैं तो फिर
शह्र से जाते हुए होता है दामनगीर कौन
(हिज्रतों= अपना देश छोड़कर दूसरे देश में बस जाना ; दामनगीर= दामन पकड़कर रोकनेवाला, जिस ने दामन पकड़ा हुआ हो)
---------------------------------------------------
आज दरवाज़ों पे दस्तक जानी-पहचानी सी है
आज मेरे नाम लाता है मिरी ताज़ीर कौन
(ताज़ीर= सज़ा)
---------------------------------------------------
कोई मक़तल को गया था मुद्दतों पहले मगर
है दरे-ख़ेमा पे अब तक सूरते-तस्वीर कौन
(मक़्तल= वधस्थल; मुद्दतों = बहुत समय; दरे-ख़ैमा = तंबू का दरवाज़ा ;सूरते-तस्वीर=तस्वीर की तरह ठिठका हुआ)
---------------------------------------------------
दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी अज़ाद हैं
देखना है खींचता है मुझपे पहला तीर कौन
--परवीन शाकिर (कोऽहम् कोऽहम् की वाल से साभार)
दस्त-बस्ता शहर में खोले मेरी ज़ंजीर कौन
(पा-ब-गिल= दलदल में फँसा हुआ, क़ैदी, बेबस; तदबीर =उपाय ; दस्त-बस्ता= जिस के हाथ बंधे हुए हों)
---------------------------------------------------
मेरा सर हाज़िर है, लेकिन मेरा मुन्सिफ देख ले
कर रहा है मेरे फ़र्दे-जुर्म को तहरीर कौन
(मुन्सिफ = न्यायाधीश, फ़र्दे-जुर्म=आरोप पत्र, तहरीर=लिखना)
---------------------------------------------------
मेरी चादर तो छिनी थी शाम की तनहाई में
बे रिदाई को मेरी फिर दे गया तशहीर कौन
(बे रिदाई= बिना स्कार्फ या नंगे सर होना, तशहीर= प्रचार, विज्ञापन)
---------------------------------------------------
सच जहाँ पा-बस्ता मुल्ज़िम के कटहरे में मिले
उस अदालत में सुनेगा अद्ल की तफ़्सीर कौन
( पा-बस्ता= जिस के पाँव बंधे हुए हों ;अद्ल=न्याय)
---------------------------------------------------
नींद जब ख़्वाबों से प्यारी हो तो ऐसे अह'द में
ख़्वाब देखे कौन और ख़्वाबों को दे ताबीर कौन
(अह'द = वादा, पक्का निश्चय, दृढ़ संकल्प; ताबीर =स्वप्नफल बताना)
---------------------------------------------------
रेत अभी पिछले मकानों की न वापस आई थी
फिर लबे-साहिल घरोंदा कर गया तामीर कौन
(लबे-साहिल= नदी के किनारे ;तामीर = निर्माण)
---------------------------------------------------
सारे रिश्ते हिज्रतों में साथ देते हैं तो फिर
शह्र से जाते हुए होता है दामनगीर कौन
(हिज्रतों= अपना देश छोड़कर दूसरे देश में बस जाना ; दामनगीर= दामन पकड़कर रोकनेवाला, जिस ने दामन पकड़ा हुआ हो)
---------------------------------------------------
आज दरवाज़ों पे दस्तक जानी-पहचानी सी है
आज मेरे नाम लाता है मिरी ताज़ीर कौन
(ताज़ीर= सज़ा)
---------------------------------------------------
कोई मक़तल को गया था मुद्दतों पहले मगर
है दरे-ख़ेमा पे अब तक सूरते-तस्वीर कौन
(मक़्तल= वधस्थल; मुद्दतों = बहुत समय; दरे-ख़ैमा = तंबू का दरवाज़ा ;सूरते-तस्वीर=तस्वीर की तरह ठिठका हुआ)
---------------------------------------------------
दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी अज़ाद हैं
देखना है खींचता है मुझपे पहला तीर कौन
--परवीन शाकिर (कोऽहम् कोऽहम् की वाल से साभार)
No comments:
Post a Comment